नवा रायपुर, छत्तीसगढ़ | विशेष संवाददाता नवा रायपुर (Nava Raipur) के नियोजित विकास और मास्टर प्लान को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। पिछले 48 घंटों से नवागांव, खपरी और सेंध जैसे संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बीच ‘बुलडोजर’ गरज रहा है। इस कार्रवाई ने जहाँ एक ओर सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराया है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय ग्रामीणों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
नवा रायपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी (NRDA) का दस्ता तीन बुलडोजर के साथ नवागांव पहुँचा। किसी भी तरह के विरोध से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने पहले ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। मौके पर 100 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था, जिसमें महिला आरक्षकों की एक बड़ी टुकड़ी भी शामिल थी।
जैसे ही बुलडोजर ने मकानों को ढहाना शुरू किया, स्थानीय निवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। कई महिलाएं अपने बच्चों के साथ बुलडोजर के सामने खड़ी हो गईं। ग्रामीणों का आरोप है कि वे यहाँ दशकों से रह रहे हैं और उनके पास इस जमीन के कुछ पुराने दस्तावेज भी हैं। खपरी के निवासियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें सामान निकालने तक का पर्याप्त समय नहीं दिया।
मौके पर मौजूद एक ग्रामीण ने रोते हुए कहा, “हमें सिर्फ 24 घंटे का नोटिस दिया गया। कड़ाके की ठंड में हम अपने बच्चों को लेकर कहाँ जाएँगे? सरकार हमें बेघर तो कर रही है, लेकिन हमारे पुनर्वास (Rehabilitation) की कोई बात नहीं कर रहा।” विरोध प्रदर्शन इतना उग्र था कि पुलिस को कई बार हल्का बल प्रयोग करना पड़ा और कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह जमीन नवा रायपुर के मुख्य विकास कार्यों (Infrastructure Development) के लिए आरक्षित है। सेक्टर-27 के पास स्थित इन जमीनों पर लंबे समय से कच्चा और पक्का अवैध निर्माण किया गया था। कार्रवाई शुरू होते ही सबसे पहले उन दुकानों को निशाना बनाया गया जो मुख्य सड़क के किनारे व्यावसायिक गतिविधियों के लिए बनाई गई थीं। इसके बाद रिहाइशी मकानों की बारी आई। NRDA के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि शहर के सुनियोजित विकास के लिए है। प्रशासन का कहना है कि “नवा रायपुर को दुनिया के बेहतरीन शहरों में से एक बनाना है और इसके मास्टर प्लान में कोई भी अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि पिछले छह महीनों में तीन बार नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन लोगों ने खुद से कब्जा नहीं हटाया। आने वाले हफ्तों में सेंध और अन्य समीपवर्ती गांवों में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहने की संभावना है। प्रशासन अब खाली कराई गई जमीन पर बाउंड्री वॉल बनाने और सौंदर्यीकरण का काम तुरंत शुरू करने की योजना बना रहा है।
