नई दिल्ली – रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 4 और 5 दिसंबर 2025 को दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर नई दिल्ली का दौरा किया। यूक्रेन के साथ चल रहे संघर्ष के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा थी, जिसने वैश्विक भू-राजनीति में भारत और रूस के बीच स्थिर और मजबूत रणनीतिक साझेदारी को एक बार फिर रेखांकित किया। यह दौरा 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के मौके पर हुआ, जो दोनों देशों के बीच संवाद का सर्वोच्च तंत्र है। राष्ट्रपति पुतिन के दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पहुँचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए उनकी अगवानी की। दोनों नेताओं ने एक ही कार में यात्रा भी की, जो दोनों की निजी और राजनयिक दोस्ती की गहराई को दर्शाता है।
शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौते हुए
- रक्षा सहयोग: रक्षा और सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति बनी, जिसमें RELOS (Reciprocal Exchange of Logistics Support) जैसे महत्वपूर्ण रक्षा-सहयोग समझौते शामिल हैं।
- आर्थिक सहयोग कार्यक्रम (2030 तक): दोनों देशों ने 2030 तक व्यापार और आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम पर हस्ताक्षर किए, जिसका लक्ष्य वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को $100 बिलियन तक बढ़ाना है।
- ऊर्जा आपूर्ति: राष्ट्रपति पुतिन ने भारत को तेल, गैस और कोयले की निरंतर आपूर्ति जारी रखने का आश्वासन दिया, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
- वीज़ा सुविधा: प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के नागरिकों के लिए मुफ्त 30-दिवसीय ई-पर्यटक वीज़ा और समूह पर्यटक वीज़ा की घोषणा की, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
यूक्रेन पर भारत का रुख: प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन के सामने स्पष्ट किया कि भारत हमेशा शांति के पक्ष में रहा है और यूक्रेन संघर्ष का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही होना चाहिए। पुतिन ने शांति प्रयासों पर भारत के ध्यान देने के लिए आभार व्यक्त किया।
राजघाट पर श्रद्धांजलि: पुतिन ने अपने दौरे के दौरान राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
अमेरिकी विश्लेषकों का मानना है कि इस यात्रा से पश्चिमी देशों को स्पष्ट संदेश गया है कि भारत, रूस को लेकर अमेरिकी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है और अपनी विदेश नीति में रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखेगा। यात्रा के समापन पर, राष्ट्रपति पुतिन ने भारत और रूस के बीच संबंधों की प्रशंसा की और कहा कि दोनों देश ‘साथ चलें, साथ बढ़ें’ की भावना के साथ आगे बढ़ेंगे।
