बालोद: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के ग्राम दुधली में आयोजित हुई ‘राज्य स्तरीय स्काउट गाइड जंबूरी’ अब अपनी उपलब्धियों के लिए नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के कारण सुर्खियों में है। इस आयोजन के लिए आवंटित करोड़ों रुपये के बजट में जिस तरह की वित्तीय अनियमितताएं सामने आ रही हैं, उसे देखते हुए इसे क्षेत्र का बड़ा ‘जंबूरी स्कैम’ कहा जा रहा है।
सुविधाओं के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति
आयोजन में शामिल होने आए हजारों स्काउट्स और गाइड्स को कड़ाके की ठंड के बीच भारी अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ा। आरोप है कि कागजों पर वाटरप्रूफ टेंट, गद्दे और पर्याप्त शौचालयों की व्यवस्था दिखाई गई थी, लेकिन धरातल पर बच्चों को ठिठुरने और मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसने पर मजबूर होना पड़ा। प्रतिभागियों ने भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं, जबकि इसके लिए प्रशासन ने भारी-भरकम राशि का भुगतान वेंडर्स को किया है।
फर्जी बिलिंग और बंदरबांट का आरोप
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्ष का दावा है कि इस जंबूरी में ‘इवेंट मैनेजमेंट’ के नाम पर बड़ा खेल हुआ है। टेंट हाउस, लाइट डेकोरेशन और कैटरिंग के बिल बाजार दर से कई गुना बढ़ाकर पेश किए गए हैं। सूत्रों का कहना है कि कई बिल ऐसी फर्मों के नाम पर जारी किए गए हैं, जिनका उस कार्य से कोई लेना-देना ही नहीं है। बिना सामान की आपूर्ति किए ही फर्जी जीएसटी इनवॉइस के जरिए सरकारी खजाने से पैसा निकाला गया है।
जांच की मांग और सुलगते सवाल
इस कथित घोटाले के सामने आने के बाद अब राज्य शासन और जिला प्रशासन के खिलाफ आक्रोश बढ़ रहा है।
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क्या बजट की राशि का सही उपयोग हुआ?
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टेंट और भोजन की जिम्मेदारी किन ठेकेदारों को दी गई और उनका चयन किस आधार पर हुआ?
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बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
विपक्ष ने इस मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि दोषियों को नहीं पकड़ा गया, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।
