रायपुर: छत्तीसगढ़ की सियासत में ‘मनरेगा’ (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) अब केवल एक रोजगार गारंटी योजना नहीं, बल्कि सत्ता और विपक्ष के बीच युद्ध का मैदान बन गई है। प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी, कांग्रेस ने सत्ताधारी भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ का ऐलान किया है। प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट और पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ का बिगुल फूंक दिया है। 31 जनवरी को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर कांग्रेस के दिग्गज नेता और कार्यकर्ता धरना देंगे। इस दौरान कलेक्टरों को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। आंदोलन के अगले चरण में 7 से 15 फरवरी के बीच जब विधानसभा का बजट सत्र चल रहा होगा, तब हजारों की संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता रायपुर पहुंचेंगे और विधानसभा का घेराव करेंगे।
कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश में भाजपा की ‘साय सरकार’ आने के बाद से मनरेगा योजना की उपेक्षा की जा रही है। पार्टी के अनुसार, केंद्र और राज्य की नीतियों के कारण मनरेगा के बजट में भारी कटौती हुई है, जिससे मजदूरों को समय पर काम नहीं मिल रहा है। इसके साथ ही, हजारों मजदूरों का महीनों का वेतन बकाया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक संकट गहरा गया है। कांग्रेस का दावा है कि सरकार जानबूझकर इस योजना को कमजोर कर रही है ताकि गरीबों का अधिकार छीना जा सके।
सचिन पायलट की सक्रियता और इस आंदोलन के जरिए कांग्रेस राज्य में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा एक संवेदनशील मुद्दा है, जिससे लाखों परिवार सीधे जुड़े हैं। इस संग्राम के माध्यम से कांग्रेस न केवल मजदूरों की आवाज उठा रही है, बल्कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए अपना वोट बैंक भी मजबूत करना चाहती है।
