रायपुर : छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक इतिहास में आज का दिन एक मील का पत्थर साबित हुआ है। लंबे समय से चली आ रही मांग और शहर की बढ़ती आबादी के दबाव को देखते हुए, राज्य सरकार ने राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली (Police Commissionerate System) को पूरी तरह से लागू कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने कानून-व्यवस्था को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल को मंजूरी दी है।
प्रशासनिक ढांचा और नियुक्तियाँ इस नई व्यवस्था के तहत रायपुर शहर की कमान अब सीधे पुलिस कमिश्नर के हाथों में होगी। 2004 बैच के आईपीएस अधिकारी संजीव शुक्ला ने रायपुर के पहले पुलिस कमिश्नर के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया है। अब तक जिले की कमान पुलिस अधीक्षक (SP) के पास होती थी, जो कई महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) पर निर्भर होते थे। लेकिन अब कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद पुलिस को मजिस्ट्रियल शक्तियां प्राप्त हो गई हैं।
शहरी और ग्रामीण का विभाजन प्रशासनिक सुगमता के लिए रायपुर जिले को दो भागों में बांटा गया है। शहरी क्षेत्र के 21 प्रमुख थाने (जैसे सिविल लाइन्स, कोतवाली, तेलीबांधा) सीधे पुलिस कमिश्नर के क्षेत्राधिकार में आएंगे। वहीं, जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के 12 थानों के लिए अलग से एसपी (ग्रामीण) की नियुक्ति की गई है, ताकि ग्रामीण इलाकों की सुरक्षा और बुनियादी पुलिसिंग पर भी पूरा ध्यान दिया जा सके।
बदलाव का प्रभाव और पुलिस की नई शक्तियाँ इस प्रणाली के लागू होने का सबसे बड़ा असर अपराधियों पर अंकुश लगाने और त्वरित निर्णय लेने पर पड़ेगा। अब पुलिस कमिश्नर के पास धारा 144 लागू करने, किसी जुलूस या प्रदर्शन की अनुमति देने, और गुंडा एक्ट व जिला बदर जैसी कार्रवाइयों के लिए स्वतंत्र अधिकार होंगे। पहले इन प्रक्रियाओं में फाइलें पुलिस से कलेक्टर कार्यालय और फिर वापस पुलिस तक आती थीं, जिससे समय अधिक लगता था। अब ‘एकल कमान’ होने से आपातकालीन स्थितियों में पुलिस बिना देरी किए कड़े फैसले ले सकेगी।
जनता को क्या लाभ होगा? आम नागरिकों के लिए यह व्यवस्था अधिक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करेगी। साइबर क्राइम, ट्रैफिक जाम और नशीले पदार्थों के बढ़ते व्यापार पर लगाम लगाने के लिए विशेष डीसीपी (DCP) रैंक के अधिकारियों की तैनाती की गई है। राजधानी में वीवीआईपी (VVIP) मूवमेंट और लगातार होने वाले विरोध-प्रदर्शनों के प्रबंधन में भी अब पुलिस अधिक स्वायत्त और पेशेवर तरीके से काम कर पाएगी।
कुल मिलाकर, रायपुर अब देश के उन चुनिंदा बड़े महानगरों की श्रेणी में शामिल हो गया है जहाँ पुलिसिंग का यह उन्नत मॉडल कार्यरत है। यह कदम न केवल अपराध नियंत्रण में मददगार होगा, बल्कि पुलिस बल के आधुनिकीकरण की दिशा में भी एक क्रांतिकारी शुरुआत है।
