काराकस/ वेनेजुएला: 3 जनवरी 2026 की तड़के सुबह, अमेरिकी विशेष बलों (Delta Force) ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस में एक अत्यंत गुप्त और साहसिक सैन्य ऑपरेशन ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ (Operation Absolute Resolve) चलाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया (Truth Social) पर पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोर्स को उनके निवास स्थल से हिरासत में ले लिया है। इस ऑपरेशन के दौरान काराकस में कई हवाई हमले और विस्फोट भी हुए। मादुरो को गिरफ्तार करने के बाद तुरंत एक अमेरिकी युद्धपोत (USS Iwo Jima) के जरिए देश से बाहर ले जाया गया। वर्तमान में उन्हें न्यूयॉर्क लाया गया है, जहाँ उन्हें अमेरिकी संघीय अदालत में पेश किया जाएगा।
इस पूरी सैन्य कार्रवाई के पीछे मुख्य कारण मादुरो पर लगे गंभीर आपराधिक आरोप हैं, जिनमें नार्को-टेररिज्म (नशीले पदार्थों का आतंकवाद), भ्रष्टाचार और अमेरिका में बड़े पैमाने पर कोकीन की तस्करी की साजिश शामिल है। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, मादुरो पर एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल (कार्टेल ऑफ द सन्स) चलाने का आरोप है, जिसके जरिए उन्होंने कोलंबियाई विद्रोही समूहों के साथ मिलकर अमेरिका में हजारों टन कोकीन की तस्करी की। इसके अलावा, उन पर 2024 के चुनावों में भारी धोखाधड़ी कर सत्ता पर अवैध कब्जा करने और अपने ही देश के नागरिकों के खिलाफ मानवता विरोधी अपराध (मानवाधिकार उल्लंघन) करने के आरोप हैं।
अमेरिका का आरोप है कि मादुरो सालों से ‘कार्टेल ऑफ द सन्स’ नामक एक अपराधी संगठन का नेतृत्व कर रहे थे, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग्स और हथियारों के अवैध कारोबार में लिप्त है। इसके अतिरिक्त, 2024 के वेनेजुएला चुनाव में धांधली के आरोपों और अपने विरोधियों के खिलाफ किए गए मानवाधिकारों के उल्लंघन ने भी उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दबाव को चरम पर पहुँचा दिया था। अमेरिका ने उन पर 50 मिलियन डॉलर का इनाम भी रखा था और लंबे समय से उनके खिलाफ एक संघीय अभियोग लंबित था। इस नाटकीय घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है, जहाँ एक ओर रूस और चीन जैसे देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और ‘साम्राज्यवादी हमला’ बताया है, वहीं वेनेजुएला के भीतर मादुरो के समर्थकों और विरोधियों के बीच तनाव चरम पर है और देश में आपातकाल घोषित कर दिया गया है।
